मथुरा वृंदावन में होली 2026: तिथियाँ, लट्ठमार होली, टिकट्स और सबसे प्रैक्टिकल 3-दिन का प्लान
मथुरा और वृंदावन में Holi 2026 25 फरवरी से 4 मार्च 2026 तक मनाई जाएगी, लेकिन आपका अनुभव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप किस शहर में और किस दिन पहुँचते हैं। कई यात्री मुख्य होली वाले दिन पहुँचते हैं और सोचते हैं कि एक ही बड़ा उत्सव होगा।
असल में मशहूर कार्यक्रम — लट्ठमार होली, फूलों की होली, मंदिरों की रस्में और सड़कों पर रंगों का उत्सव — अलग-अलग दिनों और अलग-अलग जगहों पर होते हैं।
यह गाइड एक आसान सवाल का जवाब देने के लिए बनाई गई है:
अगर आपके पास समय कम है, तो आपको कौन-सी होली देखनी चाहिए और यात्रा कैसे प्लान करनी चाहिए?
इस लेख के अंत तक आप जानेंगे:
- मथुरा वृंदावन होली 2026 की सही तिथियाँ
- कौन-सी होली देखना सबसे बेहतर है और क्या छोड़ सकते हैं
- लट्ठमार होली सुरक्षित तरीके से कैसे देखें
- शहरों के बीच वास्तविक यात्रा समय
- एक निर्णय-आधारित 3-दिन का यात्रा प्लान
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पहले समझें “मथुरा वृंदावन की होली” का मतलब
अधिकतर शहरों में होली सिर्फ एक दिन का रंगों का त्योहार होती है।
लेकिन ब्रज क्षेत्र में होली कई दिनों तक अलग-अलग शहरों में होने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला है, जो श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी है।
हर जगह इस कहानी का अलग हिस्सा दर्शाती है।
| स्थान | क्या दर्शाता है | उत्सव का प्रकार |
| बरसाना | राधा का गांव | पारंपरिक लट्ठमार होली |
| नंदगांव | कृष्ण का गांव | जवाबी उत्सव |
| वृंदावन | भक्ति और मंदिर | फूलों की होली |
| मथुरा | कृष्ण जन्मभूमि | मुख्य रंगों की होली |
इसलिए यात्रियों को यह नहीं पूछना चाहिए:
“होली कब है?”
बल्कि पूछना चाहिए:
“मुझे कौन-सा होली अनुभव चाहिए?”
यही फर्क तय करता है कि आपकी यात्रा शानदार होगी या थका देने वाली।
मथुरा वृंदावन होली 2026 की तिथियाँ
ये वे मुख्य कार्यक्रम हैं जिनके आसपास अधिकतर लोग अपनी यात्रा प्लान करते हैं।
| कार्यक्रम | तिथि 2026 | स्थान |
| लट्ठमार होली | 25–26 फरवरी | बरसाना |
| नंदगांव होली | 27 फरवरी | नंदगांव |
| फूलों की होली | 1 मार्च | वृंदावन |
| होलिका दहन | 3 मार्च | मथुरा |
| धुलंडी (मुख्य होली) | 4 मार्च | मथुरा |
ब्रज की होली एक कहानी की तरह आगे बढ़ती है, और कार्यक्रमों को इसी क्रम में देखने से पूरा अनुभव समझना आसान होता है।
कौन-सी होली वास्तव में देखने लायक है?

अधिकतर यात्री सब कुछ कवर करने की कोशिश करते हैं और आधा समय ट्रैफिक में बिताते हैं।
एक बेहतर तरीका है सही अनुभव चुनना।
अगर आपको अलग-अलग अनुभव चाहिए (Recommended)
जाएँ:
- लट्ठमार होली
- फूलों की होली
- मथुरा धुलंडी
अगर आपको सिर्फ रंगों वाली होली चाहिए
जाएँ:
- मथुरा धुलंडी
अगर आपको आध्यात्मिक अनुभव चाहिए
जाएँ:
- वृंदावन मंदिर होली
- होलिका दहन
हर कार्यक्रम का अनुभव कैसा होता है
| कार्यक्रम | भीड़ | भागीदारी | किसके लिए |
| लट्ठमार होली | बहुत ज्यादा | ज़्यादातर देखने के लिए | संस्कृति प्रेमी |
| नंदगांव | ज्यादा | बरसाना जैसा | वैकल्पिक |
| फूलों की होली | नियंत्रित | देखने के लिए | पहली बार आने वाले |
| मथुरा धुलंडी | बहुत ज्यादा | पूरी भागीदारी | त्योहार प्रेमी |
क्यों कई यात्री थक जाते हैं
सबसे बड़ी चुनौती रंग नहीं बल्कि एक शहर से दूसरे शहर जाना है।
दूरी कम है, लेकिन सड़कों को जल्दी बंद कर दिया जाता है।
सबसे आम गलती:
लोग मथुरा में रुकते हैं और उसी सुबह बरसाना जाने की कोशिश करते हैं।
नतीजा:
वे मुख्य रस्म खत्म होने के बाद पहुँचते हैं।
आपको कितने दिन चाहिए?
| अवधि | अनुभव |
| 1 दिन | सिर्फ रंगों की होली |
| 2 दिन | मंदिर + रंग |
| 3 दिन | पूरा ब्रज अनुभव |
| 5+ दिन | धार्मिक यात्रा जैसा अनुभव |
अधिकतर यात्रियों के लिए 3 दिन सबसे अच्छा अनुभव देते हैं।
सही क्रम में होली कैसे देखें
त्योहार का अनुभव धीरे-धीरे तीव्र होता है।
- बरसाना — देखें
- वृंदावन — महसूस करें
- मथुरा — खेलें
यह क्रम उत्सव की प्राकृतिक प्रगति के साथ मेल खाता है।
बरसाना लट्ठमार होली 2026: कैसे देखें

जब आप Vrindavan mein Holi सर्च करते हैं, तो जो तस्वीरें दिखाई देती हैं वे अक्सर बरसाना की होती हैं।
यही वह जगह है जहाँ महिलाएँ पुरुषों को प्रतीकात्मक रूप से लाठियों से मारती हैं — इसे लट्ठमार होली कहा जाता है।
यह 25–26 फरवरी 2026 को होती है।
असल चुनौती रस्म नहीं बल्कि भीड़ को सही तरीके से संभालना है।
लट्ठमार होली वास्तव में क्या होती है
नंदगांव के लोग बरसाना आते हैं और गीत, रंग और लाठियों की प्रतीकात्मक परंपरा के साथ स्वागत होता है।
यह रस्म राधा रानी मंदिर के पास एक चौक में होती है और लगभग 3–4 घंटे चलती है।
महत्वपूर्ण बात:
अधिकतर लोग मुख्य दृश्य इसलिए नहीं देख पाते क्योंकि वे गलत जगह खड़े होते हैं।
क्या लट्ठमार होली के टिकट लगते हैं?
सरकारी टिकट नहीं होते।
लेकिन स्थानीय लोग अपनी छत या प्लेटफॉर्म खोल देते हैं।
| देखने का विकल्प | कीमत | अनुभव |
| सड़क की भीड़ | फ्री | बहुत भीड़ |
| मंदिर सीढ़ियाँ | फ्री (जल्दी पहुँचना जरूरी) | अच्छा दृश्य |
| छत | ₹300–₹1000 | साफ दृश्य |
| प्लेटफॉर्म | ₹1500–₹4000 | सबसे सुरक्षित |
बरसाना पहुँचने का सही समय
सबसे महत्वपूर्ण टिप:
सुबह 6:30 से 8:00 के बीच पहुँचें
9 बजे के बाद:
- सड़कें बंद हो जाती हैं
- गाड़ियाँ 2–3 किमी दूर रोक दी जाती हैं
- पैदल चलना मुश्किल हो जाता है
वृंदावन की फूलों वाली होली
बरसाना की तीव्रता के बाद अनुभव पूरी तरह बदल जाता है।
1 मार्च 2026 को बांके बिहारी मंदिर में पुजारी रंगों की जगह फूलों की वर्षा करते हैं।
यह लगभग 15–20 मिनट चलता है, लेकिन सही समय पर पहुँचना जरूरी है।
अनुभव:
- भजन
- फूलों की खुशबू
- कम भीड़
- आध्यात्मिक माहौल
मथुरा धुलंडी 2026: असली रंगों की होली
4 मार्च 2026 को मथुरा में धुलंडी मनाई जाएगी।
यही वह होली है जो लोग फिल्मों में देखते हैं।
यहाँ आप सिर्फ दर्शक नहीं रहेंगे — आप भी उत्सव का हिस्सा बन जाएंगे।
आप अनुभव करेंगे:
- लगातार उड़ता गुलाल
- ढोल और नाच
- लोग चेहरे पर रंग लगाते हुए
- मंदिरों के बीच घूमती भीड़
सुबह का समय सबसे अच्छा होता है।
| समय | अनुभव |
| 7–9 AM | आरामदायक |
| 9–12 PM | सबसे ज्यादा उत्सव |
| 1 PM के बाद | थकाऊ |
मथुरा, वृंदावन और बरसाना के बीच यात्रा
| मार्ग | दूरी | सामान्य समय | होली के दौरान |
| मथुरा → वृंदावन | 12 किमी | 25 मिनट | 45–60 मिनट |
| वृंदावन → बरसाना | 45 किमी | 1.5 घंटा | 2.5–3 घंटा |
देरी का कारण दूरी नहीं बल्कि ट्रैफिक नियंत्रण है।
होली के दौरान कहाँ ठहरें
सबसे अच्छा विकल्प:
वृंदावन में रुकना
कारण:
- मथुरा और बरसाना के बीच केंद्र में
- शांत रातें
- आसान यात्रा



क्विक प्लानिंग रिकैप
अगर आपको एक बात याद रखनी है तो यह रखें:
हर कार्यक्रम के पीछे मत भागिए।
सही क्रम अपनाइए:
- बरसाना — देखें
- वृंदावन — महसूस करें
- मथुरा — खेलें
मथुरा-वृंदावन में होली के लिए घंटा-दर-घंटा यात्रा कार्यक्रम
(हर दिन का वास्तविक अनुभव कैसा होता है)
बरसाना — लट्ठमार होली का दिन
6:30–8:30 AM शांत आगमन, पहाड़ी पर पैदल चढ़ाई
9–12 PM मुख्य रस्में और सबसे ज्यादा भीड़
1 PM के बाद वापसी और परिवहन में कठिनाई
मुख्य सलाह: देर से नहीं, जल्दी निकलें।
वृंदावन — फूलों की होली का दिन
सूर्योदय मंदिर में प्रवेश शुरू
सुबह फूलों की होली का आयोजन
दोपहर आराम से घूमना
शाम आरती का सुंदर माहौल
मुख्य सलाह: यह आपका रिकवरी डे है।
मथुरा — धुलंडी का दिन
7–9 AM भाग लेने का सबसे अच्छा समय
9–12 PM उत्सव अपने चरम पर
1 PM के बाद थकाऊ और बहुत गहरे रंग
मुख्य सलाह: मज़ा आ रहा हो तभी तक रुकें।
FAQ – मथुरा वृंदावन होली 2026
होली 2026 को 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा।
25 फरवरी से 4 मार्च 2026 तक।
सुबह जल्दी पहुँचे और ऊँची जगह खड़े रहें।
लगभग 45 किलोमीटर, और होली के समय ट्रैफिक के कारण इसमें 3 घंटे तक लग सकते हैं।
सड़क बंद और भीड़ के कारण अनुशंसित नहीं।
तीन दिन का समय सबसे संतुलित अनुभव प्रदान करता है।
