कुंभ मेला 2026: तारीख, स्थान, स्नान, महत्व और यात्रा गाइड
कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है, जहां करोड़ों श्रद्धालु स्नान, साधना और दर्शन के लिए एकत्र होते हैं। कुंभ मेला चार प्रमुख स्थानों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक—में अलग-अलग समय पर आयोजित होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले अमृत कलश की बूंदें जिन चार स्थानों पर गिरीं, वहीं कुंभ मेले का आयोजन होता है। नासिक में रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर का कुशावर्त तीर्थ इस आयोजन के सबसे पवित्र स्नान स्थल माने जाते हैं।
हर बार की तरह, इस आयोजन में साधु-संतों के अखाड़े, शाही स्नान, धार्मिक प्रवचन, योग शिविर और विशाल सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे। अनुमान है कि कुंभ मेला 2026–27 में करोड़ों श्रद्धालु शामिल होंगे।
कुंभ मेला 2026 नासिक और त्र्यंबकेश्वर, महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के तट पर आयोजित होगा। इसकी औपचारिक शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को झंडा रोहण से मानी जाती है, जबकि प्रमुख स्नान पर्व जुलाई 2027 से सितंबर 2027 के बीच होंगे। यह हिंदू धर्म का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम है।
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कुंभ मेला क्या है और इसका धार्मिक महत्व क्या है?
कुंभ मेला हिंदू धर्म का विशाल तीर्थ और स्नान पर्व है, जो आध्यात्मिक शुद्धि और मोक्ष की कामना से आयोजित होता है।
कुंभ मेले का उल्लेख स्कंद पुराण सहित कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। इसकी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है, जिसमें देवताओं और असुरों के बीच अमृत कलश को लेकर संघर्ष हुआ। मान्यता है कि अमृत की बूंदें चार स्थानों पर गिरीं:
- प्रयागराज
- हरिद्वार
- उज्जैन
- नासिक
इन्हीं स्थानों पर समय-समय पर कुंभ मेला आयोजित होता है।
कुंभ मेला के प्रकार
भारत में कुंभ मेले के चार प्रमुख प्रकार होते हैं:
| प्रकार | आयोजन स्थान | समय |
| महाकुंभ | प्रयागराज | 144 वर्ष में |
| अर्धकुंभ | हरिद्वार / प्रयागराज | 6 वर्ष में |
| पूर्ण कुंभ | उज्जैन / हरिद्वार | 12 वर्ष में |
| सिंहस्थ कुंभ | नासिक | 12 वर्ष में |
कुंभ मेले का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि, साधु परंपरा का दर्शन और धार्मिक एकता को बढ़ावा देना है। यूनेस्को ने भी इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है।
कुंभ मेला 2026 कब है? (तारीख और प्रमुख चरण)
यहां कुंभ मेला 2026–27 के प्रमुख धार्मिक कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण है।
| घटना | तारीख | स्थान |
| झंडा रोहण | 31 अक्टूबर 2026 | रामकुंड, नासिक |
| नागर परिक्रमा | 29 जुलाई 2027 | नासिक |
| पहला अमृत स्नान | 2 अगस्त 2027 | नासिक |
| दूसरा अमृत स्नान | 31 अगस्त 2027 | नासिक |
| तीसरा अमृत स्नान | 11–12 सितंबर 2027 | नासिक – त्र्यंबकेश्वर |
इसके अलावा मेले के दौरान 40 से अधिक पर्व स्नान होते हैं, जिनमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।कई लोग पूछते हैं:
“kumbh ka mela kab lagega?”
मुख्य धार्मिक गतिविधियां 2027 के स्नान पर्वों के दौरान सबसे अधिक होती हैं, जबकि आयोजन की शुरुआत 2026 में हो जाती है।
कुंभ मेला कहाँ लगता है? (स्थान और घाट)

कुंभ मेला चार शहरों में आयोजित होता है, लेकिन 2026–27 का आयोजन नासिक में होगा।
नासिक
नासिक महाराष्ट्र का एक प्रमुख तीर्थ शहर है, जहां गोदावरी नदी बहती है। यहां कई पवित्र घाट हैं:
- रामकुंड
- लक्ष्मण कुंड
- गोदावरी घाट
- तपोवन घाट
रामकुंड को सबसे पवित्र स्नान स्थल माना जाता है।
त्र्यंबकेश्वर
नासिक से लगभग 30 किमी दूर स्थित त्र्यंबकेश्वर भी कुंभ मेले का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुख्य आकर्षण:
- कुशावर्त तीर्थ
- त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
- ब्रह्मगिरि पर्वत
यह वही स्थान माना जाता है जहां से गोदावरी नदी का उद्गम होता है।
कुंभ मेला क्षेत्र लगभग 4000 हेक्टेयर तक फैल सकता है और अस्थायी टेंट सिटी बनाई जाती है।
कुंभ मेले में प्रमुख स्नान और धार्मिक अनुष्ठान

कुंभ मेले का केंद्र बिंदु पवित्र नदी में स्नान करना होता है।
मुख्य स्नान
सबसे महत्वपूर्ण स्नान को अमृत स्नान या शाही स्नान कहा जाता है।
इस दिन:
- अखाड़ों के साधु जुलूस निकालते हैं
- नागा साधु सबसे पहले स्नान करते हैं
- उसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए घाट खुलते हैं
अन्य धार्मिक गतिविधियां
कुंभ मेले में केवल स्नान ही नहीं होता। यहां कई आध्यात्मिक कार्यक्रम भी होते हैं:
- गंगा आरती और पूजा
- संतों के प्रवचन
- योग और ध्यान सत्र
- धार्मिक जुलूस
- सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोक नृत्य
इस दौरान विभिन्न अखाड़े जैसे जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा और आवाहन अखाड़ा प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
नासिक कुंभ मेला कैसे पहुंचें? (ट्रैवल गाइड)
नासिक भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
हवाई मार्ग
सबसे नजदीकी एयरपोर्ट:
- नासिक ओझर एयरपोर्ट — लगभग 25 किमी
- मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा — लगभग 170–200 किमी
रेल मार्ग
मुख्य स्टेशन:
- नासिक रोड रेलवे स्टेशन
कुंभ मेले के दौरान अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जाती हैं।
सड़क मार्ग
नासिक सड़क मार्ग से भी आसानी से पहुंचा जा सकता है।
- मुंबई से दूरी: लगभग 4 घंटे
- पुणे से दूरी: लगभग 5 घंटे
मुख्य हाईवे: NH-160
कुंभ मेला यात्रा की तैयारी: रहने, खाने और पैकिंग टिप्स

यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए पहले से योजना बनाना जरूरी होता है।
रहने के विकल्प
- टेंट सिटी
- होटल
- धर्मशाला
- आश्रम
Tip: टेंट की कीमत लगभग ₹2000 – ₹10,000 प्रति रात तक हो सकती है।
भोजन
कुंभ मेले में भोजन के कई विकल्प उपलब्ध होते हैं:
- भंडारा (मुफ्त भोजन)
- स्थानीय थाली ₹100–₹200
- स्ट्रीट फूड
क्या पैक करें
यात्रियों के लिए जरूरी चीजें:
- पहचान पत्र
- दवाइयां
- पानी की बोतल
- आरामदायक जूते
- सनस्क्रीन
- मोबाइल पावर बैंक
सुरक्षा, स्वास्थ्य और जरूरी ऐप्स
इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।
संभावित व्यवस्थाएं:
- लाखों पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक
- AI आधारित CCTV निगरानी
- मेडिकल कैंप
- एम्बुलेंस सेवाएं
उपयोगी ऐप्स
कुंभ मेले में अपडेट पाने के लिए ये ऐप मददगार हो सकते हैं:
- Nashik Kumbh App
- Jio Kumbh Live
इन ऐप्स से भीड़, स्नान समय और मार्ग की जानकारी मिलती है।
कुंभ मेला 2026 के दौरान कहाँ ठहरें?
अगर आप कुंभ मेले में भीड़ से थोड़ी दूरी पर आरामदायक ठहराव चाहते हैं, तो नासिक के आसपास निजी विला या होमस्टे अच्छा विकल्प हो सकते हैं।
StayVista जैसे प्लेटफॉर्म पर आपको ऐसे कई प्रॉपर्टी विकल्प मिलते हैं जहां परिवार या समूह के साथ ठहरा जा सकता है। शांत वातावरण, निजी स्पेस और गोदावरी क्षेत्र के पास स्थित विला तीर्थ यात्रा को अधिक आरामदायक बना सकते हैं।
कई यात्री कुंभ दर्शन के बाद शहर की भीड़ से दूर रहना पसंद करते हैं, इसलिए नासिक के आसपास के हिल एरिया या अंगूर के बागानों के पास स्थित विला लोकप्रिय विकल्प बन रहे हैं।
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कुंभ मेला 2026 से जुड़े सामान्य सवाल (FAQs)
कुंभ मेला 2026 की शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को नासिक में झंडा रोहण के साथ मानी जाती है। मुख्य धार्मिक स्नान और भीड़ 2027 के स्नान पर्वों के दौरान होती है।
कुंभ मेला चार शहरों में आयोजित होता है—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। 2026–27 का आयोजन महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होगा।
प्रयागराज में 2026 के दौरान माघ मेला होता है, जो अलग आयोजन है। पूर्ण कुंभ या महाकुंभ अलग वर्षों में आयोजित होता है।
सबसे महत्वपूर्ण स्नान शाही स्नान या अमृत स्नान माना जाता है। इस दिन अखाड़ों के साधु जुलूस निकालते हैं और पवित्र नदी में सामूहिक स्नान करते हैं।
आंकड़े आयोजन के अनुसार बदलते हैं, लेकिन बड़े कुंभ मेलों में करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं। कुछ आयोजनों में कुल संख्या 10–20 करोड़ तक पहुंच सकती है।
हाँ, कई बार टीवी चैनल, सरकारी प्लेटफॉर्म और डिजिटल सेवाएं जैसे Jio Kumbh Live प्रमुख स्नान और कार्यक्रमों का प्रसारण करते हैं।
यदि आप धार्मिक अनुभव चाहते हैं तो प्रमुख स्नान तिथियां सबसे महत्वपूर्ण होती हैं। लेकिन कम भीड़ के लिए स्नान पर्व से अलग दिन चुनना बेहतर माना जाता है।
कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं का विशाल संगम है। नासिक में होने वाला कुंभ मेला 2026–27 लाखों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और यात्रियों को एक साथ लाएगा। सही योजना, यात्रा जानकारी और समय का चुनाव इस अनुभव को और यादगार बना सकता है।
